Shrimad Bhagwat Geeta Adhyay 5 in Hindi | भगवत गीता पाँचवाँ अध्याय कर्मसंन्यासयोग

Shrimad Bhagwat Geeta Adhyay 5 in Hindi | भगवत गीता पाँचवाँ अध्याय कर्मसंन्यासयोग

आर्टिकल में हम आपके लिए लाए हैं श्रीमद भगवत कथा अध्याय 5 इन हिंदी. यदि आप भगवत गीता के संपूर्ण ज्ञान को प्राप्त करना चाहते हैं तो इस आर्टिकल को ध्यान से पढ़ें. यह अध्याय पाचवा आपको शंख योग और कर्म योग में बेहद बताएगा. भगवत गीता के  अध्याय 5 का नाम है कर्म सन्यास योग.

Shrimad Bhagwat Geeta Adhyay 4 in Hindi | भगवत गीता चौथा अध्याय कर्मसंन्यासयोग
Shrimad Bhagwat Geeta Adhyay 4 in Hindi | भगवत गीता चौथा अध्याय कर्मसंन्यासयोग
  • अर्जुन कहते हैं हे भगवान श्री कृष्ण! आप कभी कभी सन्यास माध्यम से कर्म करने की बात करते हो और कभी निष्काम माध्यम से कर्म करने के लिए कहते हो. जो परम कल्याणकारी हो तथा जो मेरे के लिए आपके द्वारा निश्चित किया है इन दोनों में से वह मुझसे कहिए.
  • अर्जुन की बात सुनकर भगवान श्री कृष्ण कहते हैं परमश्रेय सन्यास माध्यम कर्म से और निष्काम माध्यम से किए गए कर्म दोनों से ही प्राप्त कर सकते हैं. लेकिन इन दोनों में से निष्काम योग शंख योग से ज्यादा श्रेष्ठ है.
  • हे महाबाहु अर्जुन! जो किसी से घृणा न करता है और किसी की इच्छा भी नहीं करता, वह मनुष्य सन्यासी के समान है. राग द्वेष सभी बंधुओं का पूर्ण तरह त्याग कर ऐसा मनुष्य संसार बंधन से सुख पूर्वक मुक्त हो जाता है.
  • जो मनुष्य शंख योग और निष्काम कर्म योग को अलग समझते हैं वह अल्प ज्ञानी होते हैं, वह पूरी तरह विद्वान मनुष्य नहीं होते.
  • निष्काम कर्मयोग वह है जो ज्ञानी योगियों द्वारा प्राप्त किया जाता है इसीलिए शंख योग और निष्काम योग दोनों को जो मनुष्य फल की दृष्टि से एक समान देखता है वास्तविक सत्य तो वही देख पाता है.
  • हे अर्जुन भक्ति योग का आचरण करे बिना ही सन्यास लेना दुख का कारण होता है निष्काम कर्मयोगी जो मन में भगवान के किसी भी रूप को धारण करता है परब्रह्म परमात्मा को जल्दी प्राप्त हो जाता है.
  • इंद्रियों पर जो विजय प्राप्त कर लेता है वही कर्मयोगी होता है सभी कर्म फलो को जो को समर्पित उत्तर निष्काम भावना के साथ कर्म करता है वही कर्मयोगी है, तो पाप कर्म उसे कभी भी स्पर्श नहीं कर पातें है.

Shrimad Bhagwat Geeta Adhyay 4 in Hindi | भगवत गीता चौथा अध्याय ज्ञानकर्मसंन्यासयोग

Yatharth geeta adhyay 5, Shrimad Bhagwat Geeta Adhyay 5 in Hindi

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