Bhagwat Geeta Adhyay 1 in Hindi | श्रीमदभगवदगीता पहला अध्याय

Shrimad Bhagwat Geeta Adhyay 1 In Hindi: श्रीमद्भगवद्गीता हिंदुओं के पवित्रतम ग्रंथों में से एक है। महाभारत के अनुसार, भगवान कृष्ण ने कुरुक्षेत्र युद्ध में अर्जुन को गीता का संदेश सुनाया था। यह महाभारत के भीष्म पर्व के तहत दिया गया एक उपनिषद है। एकेश्वरवाद, कर्म योग, ज्ञान योग, भक्ति योग की चर्चा भगवद् गीता में बहुत खूबसूरती से की गई है।

आज हम हिंदू महापुराण श्रीमद भगवत गीता के अध्याय 1 की शुरुआत करने जा रहे हैं. आप पूरे ध्यान से इसे पढ़ें और समझने की कोशिश करें. यहां मिले हुए ज्ञान से आप अपने जीवन को ईश्वर से जोड़ सकते हैं और सफलता प्राप्त कर सकते हैं.

Bhagwat Geeta Adhyay 1 in Hindi | श्रीमदभगवदगीता पहला अध्याय 

Bhagwat Geeta Adhyay 1 in Hindi | श्रीमदभगवदगीता पहला अध्याय
Bhagwat Geeta Adhyay 1 in Hindi | श्रीमदभगवदगीता पहला अध्याय

Bhagwat Geeta Adhyay 1 in Hindi | श्रीमदभगवदगीता पहला अध्याय

  • धृतराष्ट्र संजय से कहते हैं कि धर्म भूमि और कर्म भूमि पर युद्ध करने के लिए इकट्ठे हुए पांडु के और मेरे पुत्र क्या कर रहे हैं?
  • संजय कहते हैं राजा दुर्योधन इस समय चक्रव्यू रचना आयुक्त पांडवों की सेना को देख रहे हैं और द्रोणाचार्य के समीप जाकर यह कहा.
  • हे आचार्य! द्रुपद पुत्र धृष्टद्युम्न ने जो पांडू पुत्रों के लिए व्यूहाकार खड़ी इस बड़ी सेना को देखिए.
  • इस सेना के साथ बड़े-बड़े धनुष वाले महारथी हैं. भीम और अर्जुन के जैसे शूरवीर और विराट महारथी राजा द्रुपद, धृष्टकेतु तथा बलवान काशीराज, और द्रोपति के पास जो पुत्र भी हैं.
  • हे ब्राह्मण में श्रेष्ठ! आप यह परख लीजिए की अपने पक्ष में कौन-कौन प्रधान है. मैं आपकी सहायता के लिए जो जो सेनापति है उन्हें बुला देता हूं.
  • द्रोणाचार्य आप, भीष्म पितामह, करण तथा अश्वत्थामा, विकर्ण जैसे मेरे लिए पुराण त्याग देने वाले शूरवीर युद्ध में चतुर है.
  • हमारी यह सेना जो बीच में पितामह सुरक्षित है हर तरह से अजय है और जीतने में सुगम है.
  • आप सबको इसीलिए अपनी अपनी जगह पर रहते हुए भीष्म पितामह की रक्षा करना है.
  • कौरवों की सेना में सबसे बड़े प्रतापी बीच में दुर्योधन को खुश करने के लिए ऊंची आवाज में शेर की दहाड़ की तरह गरज कर शंख बजा दिया
  • तत्पश्चात शंख, नगाड़े ओल्ड होल आदि बजने लगे वह भी एक साथ.
  • इसके बाद श्री कृष्ण और अर्जुन जो सफेद घोड़ों वाले उत्तम रथ पर बैठे हुए थे उन्होंने भी अपना शंख बजा दिया.
  • श्री कृष्ण ने जो शंख बजाया उसका नाम पाञ्चजन्य था. अर्जुन ने देवदत्त और भीम ने पौण्ड्र नाम वाले अपने-अपने शंख बजाएं.
  • कुंती के पुत्र युधिष्ठिर ने अनंत विजय और नकुल सहदेव ने मणि पुष्पक नाम के शंकु को बचाया.
  • बड़े धनुष के साथ काशीराज, शिखंडी, धृष्टद्युम्न, द्रोपदी के पुत्र आदि ने भी हर तरफ से अपने-अपने शंख बजाएं.
  • इस शंख वादन से जो तूने उत्पन्न हुई उसने आकाश और पृथ्वी को भी हो गुंजा दिया और धार्तराष्ट्रों के ह्रदय वितरण हो गए.
  • अर्जुन ने मोर्चे पर खड़े हुए धृतराष्ट्र संबंधियों को देखा और श्री कृष्ण कहा हे भगवान! मेरे रथ को दोनों सेनाओं के बीच में ले चलिए.
  • मैं देखना चाहता हूं की युद्ध करने के लिए डटे हुए इन विपक्षी योद्धाओं को. और यह जान लूं की इस युद्ध में मुझे किस किस के साथ युद्ध करने योग्य है.

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